hindi shayari


HINDI SHAYARI


उमर कितनी मंजिलें तय कर चुकी थी मगर,
दिल एक बार तेरे दिल सेटकराया तो ठहर ही रह गया!

आहिस्त बोलने  का तेरा अंदाज बहुत कमाल है

 गान सुनते कुछ नहीं लेकिन दिल सब समझ जाता है



नाम तेरा ऐसे लिख चुका हूँ अपने वजूद पर,
की हम-नाम कोई तेरा मिल जाए तो भी हदल धड़क जाता है

इतनी तिज़ीब से पेश आना आदत है तुम्हारी
या, मुझे क़त्ल करने की साजिश है तुम्हारी

कितने मजबूर है हम इस इश्क के हातों,
ना तझु पाने की औकात, ना तझु खोने का हौसला

उस के साथ रहते रहते , उस की चाहत सी हो गयी है;
उससे बात करते करते, उसकी आदत सी हो गयी है;
एक पल ना मिले तो बेचेनी सी लगती है,

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