Hussaini Shayari






Hussaini Shayari 


1   जो सब्र के बादशाह हैं उन्हें हुसैन कहते हैं

       जो पानी के शहंशाह हैं उन्हें हुसैन कहते हैं

       जो सिर खा कर भी ना रुके उन्हें हुसैन कहते हैं

       और जो सर कटा कर भी जिंदा हैं उन्हें हुसैन कहते हैं


                                       इरफान शेख मदारी



2     हुसैन जिंदा है दस्तूर है जिंदगी की तरह
 शहीद मरता नहीं आम आदमी की तरह

      यजीद डूब गया शाम के अंधेरे की तरह

        सेल फैल रहा है दुनिया में रोशनी की तरह



3   शाह अस्त हुसैन बादशाह अस्त हुसैन

     दिन अस्त हुसैन दिन पनाह अस्त हुसैन

    सर  दाद,  ना दाद

     दर दस्त ए यज़ीद

     हक्का के बिना ला इलाहा अस्त हुसैन


             ख्वाजा गरीब नवाज



4  कर्बला में एक तरफ पानी था

 और दूसरी तरफ  प्यास

 और जो पानी पीते रहे वह मर गए

 जो प्यासे थे वह आज भी जिंदा है


5 एक इशारे पर बादल भी उतरा आता, 

पर प्यासे ही सर कटाया हुसैन ने..


                           आमिर शैक्ख


6 नबी ने बताया था के

  जन्नत के सरदार कौन है

नावासों ने बता दिया के

  जन्नत के सरदार क्यों है..


7 इस्लाम जिंदा होता है,

 हर कर्बला के बाद..


 8 कौन कहता है कि पानी को तरसते थे हजरत हुसैन

 उनके होठों को तरसता रहा प्यासा पानी

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