hussaini shayari
1 जिसने सजदे में सर कटा दिया इमाम हुसैन वो,
मर्तबा क्या होगा उनका जो इब्ने अली और नवासा ए रसूल हो
2 सजदे में सर कटाने को आखिर कटा दिया,
लेकिन खुदा के नाम का डंका बजा दिया
3 कटा कर गर्दन दिखला गए हैं कर्बला वाले,
कभी बंदे के आगे झुक नहीं सकते खुदा वाले
4 कोई जा कर पूछ ले कर्बला के गर्द ओ गुबार से,
लख्ते जिगर के टुकड़े गिने हैं अली के लाल ने
5 खुदा की राह में सर को कटा दिया तुमने,
नबी के दिन पे घर को लुटा दिया तुमने,
निशाना ए कुफ्र को मिटा दिया तुमने,
तुम्हें खुदा भी तुम्हारा, सलाम करता है
6 कभी भी अपनी जिस्मानी ताकत और दौलत पर भरोसा ना करना क्योंकि
बीमारी और ग़ुरबत आने में देर नहीं लगती
इमाम अली अलैहिस्सलाम
7 जब तुम्हें यकीन हो के खुदा हमेशा तुम्हारे साथ है
तो फिर कोई फर्क नहीं पड़ता कि कौन-कौन तुम्हारे खिलाफ
8 लोगों का अपनी जरूरत के लिए तुम से वाबस्ता होना
तुम पर अल्लाह की नेमत है इन नेमतों से ना घबराओ
वरना यह मुसीबतों में बदल जाएंगी
9 यूं ही नहीं है जहां में चर्चा हुसैन का
कुछ देखकर हुआ था जमाना हुसैन का
सर देख कर दो जहां की हुकूमत खरीद ली
मैहंगा पड़ा यज़ीद को सौदा हुसैन का
10 पानी बंद कर यज़ीद ने
खानदान ए नबी पर
जुल्मो सितम किया
कासीम पे खजरो से वार
और नन्हे असगर को
तीरों से शहीद किया
दिन ऐ मोहम्मद की खातिर
हुसैन ने अपने अज़ीज़ों को
कुर्बान कर दिया
पानी बंद कर यज़ीद ने
खानदान ए नबी पर
जुल्मो सितम किया
कासीम पे खजरो से वार
और नन्हे असगर को
तीरों से शहीद किया
दिन ऐ मोहम्मद की खातिर
हुसैन ने अपने अज़ीज़ों को
कुर्बान कर दिया
सर कटा दिया हुसैन ने
मगर इस्लाम का सर
झुकने नहीं दिया
इल्मा हुसैन
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